Kundli Vishleshan-7

Birth Details:

DOB: 5 Dec, 2005
TOB: 22:35 PM
POB: Kharar (Punjab)

जन्म दिन का ग्रह: चंद्रमा
जन्म समय का ग्रह: शनि

विशेष स्थिति:
अवस्था ग्रह
सूरज बुध इकठ्ठे मंगल नेक
अँधा टेवा नहीं है
साथी/बिल्मुकाबिल के ग्रह सूरज-बुध, चन्द्र-शुक्र, मंगल-शनि
गुरु-मंगल,
स्वगृही सूरज, शुक्र
उच्च ग्रह बृहस्पति, मंगल
नीच ग्रह शनि, केतु, राहू
ग्रहफल का सूरज, शुक्र
राशिफल का कोई नहीं
किस्मत को जगाने वाला सूरज, शुक्र
ऋण पितृ (आंशिक) आजीवन पीपल की सेवा करें

फलादेश:
लग्नस्थ शनि फल:
इस घर/भाव में शनि नीच है अतः पश्चिम मुखी मकान का साथ (में रहना) अशुभ फल देगा अतः ऐसे घर में ना रहें चूंकि राहू केतु भी दोनों नीच है अतः शनि भी अशुभ ही फल देगा, अगर अशुभ हुआ तो भी 36 या अधिक से अधिक 39 वर्ष आयु तक अशुभ फल देगा, जातक धनहीन होगा, विद्या अधूरी और गृहस्थ भी दुखी होगा (वजह झगडे आदि)
इस घर में शनि एक आँख से नं: 7 में बैठे हुए चन्द्र व् शुक्र पर दृष्टिपात करेगा: उम्र रेखा से शाख चंदर के बुर्ज में जाती हुई यानि शनि की दृष्टि चन्द्र पर और दोनों शत्रु भी है और दोनों के मेल से केतु नीच भी होगा (जो पहले से ही नीच घर में है) अब शनि चन्द्र को खराब करेगा, अँधा घोडा, माता पर कष्ट, विद्या में रुकावट, कमजोर दिल, आँख में नुक्स, वाहन से कष्ट आदि हो सकता है, 44 साल उम्र तक ये खतरा बना रहेगा।
शुक्र पर शनि की दृष्टि, दोनों ग्रह 52 साल उम्र तक इकठ्ठे फल देंगे, दोनों के प्रभाव से केतु उच्च फल देगा, मगर चन्द्र शनि के प्रभाव से केतु पहले 44 साल नीच फल देगा और 44 के बाद 52 साल उम्र तक उच्च फल देगा। ज़बान का चस्का खराब करेगा। करीबी रिश्तेदारों के साथ कोई भी कारोबार करने से नुकसान ही होगा, अतः बचें।
चन्द्र-शुक्र-शनि में दृष्टि सम्बन्ध के फलस्वरूप जाती असर कोई खास शुभ फल नहीं देगा, आर्थिक रूप से कमजोर और ससुराल भी कोई खास नेक व् सहायक नहीं होंगे।
तृतयस्थ केतु का फल:
ऐसा व्यक्ति नेकी को याद रखने वाला और बदी को भुला देने वाला होगा और स्वयं ही दूसरों की मदद करने के लिए हर समय बिन बुलाये ही हाज़िर हो जायेगा, भाईयों से दूर परदेस की ज़िन्दगी या भाई जातक से दूर परदेस में होंगे, दूसरों का एहसान मानने वाला। भाई बंधू दोस्तों से विरोध मिलेगा, गृहस्थ के झगडे, किसी दुसरे सलाहकार की गलत सलाह से सुख खराब होगा, कानों का कच्चा, पांवों में चक्कर, हवा-ए-बद और नींद में ज़हरीली हवा यानि नींद खराब करने वाला, केतु नीच की निशानी है की बचपन में फोड़े-फुंसी बहुत होंगे और अगर ऐसा है तो समझे केतु नीच होगा। ससुराल व् भाईयों से तंग परदेस में ज़िन्दगी बसर होगी खासकर 44 तक केतु नीच फल देगा। भाईयों से झगडा ना करें, दक्षिणमुखी मकान भी कोई शुभ फल नहीं देगा। कान-रीढ़-घुटने-कमर आदि के दर्द में जिस्म पर सोना मददगार होगा।


चतुर्थ बृहस्पति का फल:
ह्रदय रेखा से शाख बृहस्पति के पर्व में जाती हुई। जहाँ एक तरफ बृहस्पति अपने उच्च भाव में है तो वहीँ मंगल 10 से शुभ फल और राहू 9 से अशुभ फल देगा। या यूँ कह ले की बृहस्पति अपनी और मंगल की आयु (मियाद) में (8-16-28 से 33 की उम्र में शुभ) व् (21-36-42 से 48 की उम्र में अशुभ) फल दे सकता है। बृहस्पत नेक हुआ तो उच्च पद, लाटरी, दफनिया (अचानक धन), सोने की खान, और धन दौलत का दरिया बहता होगा, दुनियावी गृहस्थ में वक़्त मुसीबत पानी में सीधा तैरने वाला शेर होगा, धर्म से ताल्लुक और हुकूमत की ताकत का मालिक होगा, राजदरबार से फायदा, हर तरह की शांति, आलिशान घर, रहमदिल और हमदर्द होगा, गृहस्थ-ज़मीन जायदाद-धन-विद्या-भाई बंधू सबका शुभ फल मिलेगा।
राहू नवमस्थ से चंदर खराब यानि माता-विद्या-नगद माल की कमी करेगा, बाकि सब बातों में शुभ फल मिलेगा।
ज़ाती किस्मत माता खानदान यानि की नानके परिवार के सहयोग से बढ़ेगी, यानि भाग्य उदय में नानके परिवार का भी हाथ होगा आपके जनम से या जनम के बाद पिता की खूब तरक्की होगी या पिता सरकारी नौकरी में हुआ तो प्रमोशन होगी। हर समय सोना धारण करने से बृहस्पति के शुभ फल में बढौतरी होगी।
सूर्य-बुध पंचमस्थ फल:
सूरज-बुध इकठ्ठे पंचम भाव में सरकार से धन लाभ अवश्य करवाते हैं। मगर शनि 1 और राहू 9 से सूरज को ग्रहण होगा और हो सकता है की सूर्य कम से कम 36 और अधिक से अधिक 42 साल उम्र तक अपना शुभ फल ना दे पाए, यानि सरकारी मुलाजमत (नौकरी) मिलने में व्यवधान उत्पन्न होगा। 25 वर्ष उम्र से पहले शादी ना करें, व्यापार की अपेक्षा नौकरी आदि में तरक्की होगी।
लड़का पैदा होने के दिन से परिवार/जीवन में तरक्की और पूर्वी दिवार की तरफ रसोई और भी ज्यादा नेक व् शुभ फल प्रदान करेगी। सूरज-बुध के मेल से बुध-आदित्य (वैदिक अनुसार) योग भी बनता है जिसके परिणामस्वरूप जातक अक्लमंद व् तेज़ दिमाग होगा। पंच्मस्थ बुध के प्रभाव से नेक नियत, इंसानियत का मालिक, भाग्यशाली नेक औलाद, घर गौ घाट होगा शुभ फल वास्ते आजीवन दुर्गा/कंजक पूजन करें एवं ज़बान पर काबू रखने से भी बुध कभी अशुभ फल नहीं देगा।
चंदर-शुक्कर सप्तम भाव में:
दूध में मिटटी या गृहस्थ में सास की टोका टाकी जैसा फल होगा, यानि नूंह सास का झगडा आम होगा दोनों इकठ्ठे एक दुसरे का नुकसान ही करेंगे। धार्मिक होने या धर्म के मार्ग पर चलने से दोनों ग्रह शुभ फल देंगे अन्यथा ज़बान का चस्का खराब ही करेगा यानि धन की तंगी, माता पर कष्ट खासकर आँखों में, नूंह सास का झगडा, ऐसे में गाय को हरा चारा डालते रहने से भी शुभ फल मिलेगा।
शनि की दृष्टि के फल स्वरुप 15 साल तकलीफ या बीमारी (24/37 साल उम्र से) या धन की तंगी रह सकती है।
जहाँ एक और चन्द्र का फल खराब होगा वहीँ शुक्र फिर भी बचा रहेगा और शुभ फल देगा। सप्त्मस्थ शुक्र अधिकतर परदेस में जीवन यापन के अवसर प्रदान करता है। जीवनसाथी की तरफ से पूर्ण सहयोग मिलेगा, नेक स्वाभाव होगा। 25 वर्ष उम्र के बाद शादी होने पर गृहस्थ भी सुखी होगा।


मंगल दशम भाव में:
चींटी के घर भगवन आये की तरह परिवार को तारने वाला यानि जिस घर में भी जन्म होगा, भले ही वह घर पहले आर्थिक तौर पर इतना समृद्ध ना हो मगर जातक के जन्म के बाद ज़रूर समृद्ध हो जायेगा। जातक स्वयं राजा (उच्च पद) और अपनी मेहनत से धन बना लेगा खासकर 28 से 33 वर्ष या मंगल की दशा में, भाईयों के सहयोग से भाग्योदय हो सकता है। बृहस्पति का सोना (दृष्टि) मंगल की अग्नि में तप कर कुंदन बनेगा, यानि की जातक के भविष्य निर्माण में इन दो ग्रहों का भरपूर योगदान होगा बृहस्पत यानि सोना-पिता-बाबा-कानून-शिक्षा-फाइनेंस-बैंकिंग आदि और मंगल यानि भाई-बंधू-खाना-पीना-होटल-रेस्टोरेंट-सिविल-IAS-IPS आदि आदि। अतः जीवन में आगे चलकर इन क्षेत्रों में सफलता मिलने के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।
राहू नवं भाव में:
नवमस्थ राहू नीच माना गया है, इस घर में राहू के प्रभाव से बृहस्पति भी अब चुप होगा यानि बृहस्पति अपना शुभ फल देने में असमर्थ होगा या बृहस्पति का पूर्ण शुभ फल 48 वर्षायु के बाद मिल पायेगा। यदि जातक अधार्मिक हो यानि धर्म से दूर रहने या ना मानने वाला हो तो सेहत खराब और औलाद (लड़के) से भी कोई सुख नहीं मिल पाता। भाई बहनों से इत्तेफाक रखने पर (मधुर सम्बन्ध) बरकत होगी, और धर्म कर्म से दूर तो औलाद निकम्मी नालायक या होगी ही नहीं, अतः धर्म का पालन करें और भाई बहनों से भी सम्बन्ध बना कर रखें।



किस्मत का असर:
भाग्य रेखा अपूर्ण और जगह जगह से अभी कटी हुई है। गुरु-मंगल-सूर्य और शुक्र ये सब ग्रह किस्मत में सहायक होंगे वहीँ दूसरी और शनि-राहू-केतु तीनो नीच है अतः भाग्य के रस्ते में रुकावट पेश करेंगे, बुध सूर्य के साथ से शुभ रहेगा।
शनि (नीच) के प्रभाव से किस्मत का असर जनम से कोई खास नेक व् शुभ नहीं होगा। बृहस्पत चूंकि अपने उच्च भाव में है और कायदे से बृहस्पति 16 वर्ष की आयु से भाग्य उदय करने में सहायक होना चाहिए मगर राहू (नीच) नवम भाव में बैठकर हो सकता है की बृहस्पति को समय पर शुभ फल ना देने दे, जिस कारन हो सकता है की भाग्य उदय 22 यानि सूर्य अथवा 28 मंगल के समय में हो, लेकिन 36 से 42 या 48 वर्ष तक का समय काफी संघर्ष भरा रह सकता है क्यूंकि तीनो शनि-राहू-केतु नीच है अतः इनके दिए हुए उपाय करते रहने से आराम रहेगा। भाग्य वृद्धि के लिए बृहस्पति (पुखराज), मंगल (लाल मूंगा) व् सूर्य (मानिक) रत्न किये जा सकते है।
वैवाहिक जीवन/सुख:
27 या कम से कम 24 वर्ष उम्र से पहले शादी करना आपके लिए गैर मुबारिक यानि अशुभ होगा, अतः परहेज करें। 27 वर्ष उम्र के बाद शादी करना शुभ रहेगा बल्कि शादी भी हो जाएगी। वैसे बृहस्पति चौथे भाव में हो तो जल्द शादी के योग बना देता है मगर संभव हो तो 27 तक शादी टाल दे। सूर्य-बुध के संयोग से स्वयं या पति उच्च पद पर कार्यरत होगा, चंदर-शुक्र (शनि से दृष्ट) के संयोग से धन व् सुख हो सकता है की उम्र के पहले 39 साल तक कम हो या ज्यादा से ज्यादा तलाक या जुदाई भी हो सकने की संभावना, मगर बाद में पूरा सुख होगा। दोनों पति-पत्नी की उम्र लगभग बराबर ही होगी। हर हाल में ससुर नहीं होगा या रहेगा।
विशेष:
? जिस लड़के की कुंडली में अकेला राहू 1-5-7-8-11-12 भाव में हो या बुध-राहू इकठ्ठे 3-8-9-12 भाव में हो या अकेला शनि 2 भाव में बैठा हो तो ऐसे लड़के से शादी नहीं करनी है।
? किसी भी फ़क़ीर को आपने कभी भी कोई रूपया पैसा दान नहीं करना।
आर्थिक स्थिति:
बृहस्पति-मंगल के शुभ दृष्टि सम्बन्ध से श्रेष्ठ धन होगा लेकिन अन्य कुयोगों के चलते मिलेगा देर से या स्वयं उपभोग नहीं कर पाए ऐसा भी संभव है, किन्तु 36 वर्ष उम्र के बाद उत्तम धन-धान्य होगा। हालाँकि अकेला चंदर नं: 7 में उत्तम है और अकेला शुक्र भी नं: 7 में शुभ है मगर दोनों की युति इस घर में फ़ालतू धन जमा करने में कोई मदद नहीं करेगी। (नोट: यह आर्थिक विश्लेषण केवल जातक का है वो भी अगर जातक कामकाजी महिला है अन्यथा इस विश्लेषण का कोई अर्थ नहीं होगा) चतुर्थ भाव में बृहस्पति खूब धन के अवसर देगा, धन भी देगा मगर केतु तीसरे खर्च करवा देगा यानि स्वयं या औलाद पर खर्च होता जायेगा। राहू नवमस्थ की वजह से शायद बुजुर्गों से कोई खास आर्थिक मदद नहीं होगी, जातक अपने बलबूते ही धन पैदा करेगा। मगर सूर्य-बुध पंचम है तो औलाद नेक और भाग्यवान होगी तो ज़ाहिर है की खर्च अपने पर ही होगा।
औलाद यानि केवल लड़के (लड़कियां पराया धन है):
सूरज-बुध पंचम भाव में युतियोग अतः औलाद नेक और भाग्यवान होगी, माता-पिता का नाम रोशन करेगी और माता पिता से अधिक तरक्की करेगी। शुक्र-शनि में दृष्टि सम्बन्ध से केतु उच्च भी है और चन्द्र-शनि में दृष्टि सम्बन्ध से नीच भी है अतः औलाद होगी अवश्य मगर हो सकता है की विलम्ब से हो, पति की कुंडली से भी फर्क पड़ेगा।
सेहत/बीमारी:
लग्नस्थ शनि के प्रभाव से सूर्य एवं चन्द्र दोनों पीड़ित है जिसके फलस्वरूप दिल व् आँखों से सम्बन्धी रोग आगे चलकर परेशान कर सकते हैं अतः हो सकता है की बहुत जल्द कम उम्र में ही चश्मा लग जाए और दिल को मज़बूत रखने के लिए खानपान का ध्यान रखें और शनि का ऊपर दिया उपाय करें। केतु-मंगल की टक्कर से पेट या मेदा कमजोर हो सकता है (केतु का उपाय)। बृहस्पत-राहू में टक्कर से सांस अथवा कोई न कोई एलर्जी आदि की शिकायत रह सकती है (राहू का उपाय)। मंगल-बुध से दन्त रोग होने की संभावना बन सकती है।
?सब दुनियावी हिसाब किताब है, कोई दावा-ए-खुदाई नहीं?
?कर भला हो भला अंत भले का भला?